होली: केवल गुलाल नहीं, क्रोध-ईर्ष्या को प्रेम में बदलें, मनाएं आंतरिक आनंद का उत्सव.
होली: केवल गुलाल नहीं, क्रोध-ईर्ष्या को प्रेम में बदलें, मनाएं आंतरिक आनंद का उत्सव.
- •होली केवल रंग लगाने का नहीं, बल्कि भीतर से प्रेम और आनंद की सुगंध फैलाने का उत्सव है.
- •क्रोध, लालच, घृणा जैसे 'अशुभ रंगों' से बचें; जीवन में उत्साह और प्रेम के रंग भरें, दिव्य आस्था रखें.
- •मन की भावनाओं के साक्षी बनें; स्वयं को सुधारें और दूसरों के प्रति करुणा व समझ रखें.
- •दूसरों को दुख देने वाले स्वयं पीड़ित होते हैं; खुशी बांटने से कई गुना वापस मिलती है, यह कर्म का सिद्धांत है.
- •आंतरिक संतुष्टि से समाज और राष्ट्र की सेवा करें; होली को 'आत्मा के रंगों' से रंगीन बनाएं.