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रंग पंचमी पर करीला धाम में श्रीराम के बिना माता सीता की पूजा, त्रेतायुग से लगता है मेला.
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करीला धाम: जहां सीता की पूजा राम के बिना, त्रेता युग से रंग पंचमी मेला.
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News18
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08-03-2026, 15:56
करीला धाम: जहां सीता की पूजा राम के बिना, त्रेता युग से रंग पंचमी मेला.
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बुंदेलखंड और चंबल का सबसे बड़ा आस्था केंद्र, विश्व प्रसिद्ध करीला धाम मेला रंग पंचमी पर आयोजित.
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यहां माता जानकी की पूजा भगवान राम के बिना, लव, कुश और ऋषि वाल्मीकि के साथ होती है.
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मनोकामना पूरी होने पर 'बधाई' नृत्य की परंपरा, विशेषकर 'राई बधाई'; संजय दत्त ने भी यहां बधाई करवाई थी.
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मान्यता है कि त्रेता युग में लव और कुश का जन्म यहीं हुआ था, जहां अप्सराओं ने पहली 'बधाई' नृत्य किया था.
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पवित्र गुफा, लव-कुश के जन्मस्थल के रूप में मानी जाती है, केवल रंग पंचमी पर खुलती है; भक्त पवित्र राख घर ले जाते हैं.
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