पौष कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत की विधि
धर्म
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News1816-12-2025, 14:04

17 दिसंबर पौष प्रदोष व्रत: भोलेनाथ संग सूर्य देव की पूजा से ग्रह बाधाएं होंगी दूर.

  • प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में इनकी पूजा अत्यंत फलदायी होती है.
  • पौष मास के प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ ग्रहों के स्वामी सूर्य देव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है.
  • इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति होती है, ग्रहों का शुभ प्रभाव मिलता है और ग्रह बाधाएं समाप्त होती हैं.
  • प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का 90 मिनट का समय होता है.
  • पौष मास का पहला प्रदोष व्रत 17 दिसंबर बुधवार को है, जिसका प्रदोष काल शाम 4:26 से 5:56 तक रहेगा.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यह व्रत ग्रह बाधाओं को दूर कर शुभ फल देता है.

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