शय्या दान का महत्व
धर्म
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News1803-02-2026, 18:30

शय्या दान: मृत्यु या कल्पवास के बाद ही क्यों होता है यह रहस्यमयी दान?

  • शय्या दान का अर्थ है सोने के बिस्तर और संबंधित वस्तुओं का दान करना, यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रथा है.
  • यह मुख्य रूप से दो अवसरों पर किया जाता है: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए, या 12 साल का कल्पवास पूरा करने पर.
  • कल्पवास माघ मास में प्रयागराज के संगम पर मनाया जाने वाला एक महीने का आध्यात्मिक अभ्यास है, जिसमें कठोर नियम, पूजा और दान शामिल हैं.
  • यह दान त्याग, सेवा का प्रतीक है और माना जाता है कि यह आध्यात्मिक अभ्यास की गलतियों का प्रायश्चित करता है और पुण्य बढ़ाता है.
  • अधिकृत प्राप्तकर्ताओं में मृत्यु के बाद महापात्र ब्राह्मण और प्रयागराज में प्रयागवाल जैसे स्थानीय तीर्थ पुरोहित शामिल हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: शय्या दान आत्मा की शांति या कल्पवास पूर्ण होने पर किया जाने वाला एक गहरा आध्यात्मिक दान है, जो त्याग और पुण्य का प्रतीक है.

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