गुरुदेव श्री श्री रविशंकर.
धर्म
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News1810-02-2026, 13:14

श्री श्री रवि शंकर ने समझाया 'तुरीय अवस्था': चेतना की चौथी अवस्था का विज्ञान.

  • श्री श्री रवि शंकर के अनुसार, प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि मन, हृदय, शरीर और पर्यावरण को शुद्ध करने वाली शक्ति है.
  • घृणा से स्वयं को ही सबसे अधिक हानि होती है, जिससे नकारात्मक गुण अवशोषित होते हैं, जैसा कि विष्णु के द्वारपालों की पौराणिक कथा में दर्शाया गया है.
  • पुराणों की कहानी बताती है कि तीव्र एकाग्रता, भले ही घृणा के माध्यम से हो, मुक्ति और चेतना में विलीन होने का मार्ग बन सकती है.
  • प्रेम स्वयं से शुरू होता है; जैसे-जैसे यह गहरा होता है, व्यक्तिगत रूप फीके पड़ जाते हैं और केवल शुद्ध प्रेम शेष रहता है.
  • ध्यान (तुरीय अवस्था) चेतना की चौथी अवस्था है जहाँ मन विस्तृत और सजग दोनों होता है, जो आनंद के लिए पूरे तंत्र का पोषण करता है.

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