बॉलीवुड ने अपने 'वफादार' बाल दर्शकों को क्यों भुलाया? तरण आदर्श के साथ विश्लेषण.

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News18•22-01-2026, 12:19
बॉलीवुड ने अपने 'वफादार' बाल दर्शकों को क्यों भुलाया? तरण आदर्श के साथ विश्लेषण.
- •बॉलीवुड ने 'मासूम' और 'मिस्टर इंडिया' जैसी बाल-केंद्रित फिल्मों से हटकर 'एनिमल' और 'पठान' जैसे हिंसक कंटेंट पर ध्यान केंद्रित किया है.
- •फिल्म निर्माता बच्चों के लिए लेखन को 'छोटा काम' मानते हैं और मानते हैं कि 'एनिमल' जैसी फिल्में 800 करोड़ कमा सकती हैं, तो बच्चों की फिल्मों पर मेहनत क्यों करें.
- •ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श का मानना है कि अगर अच्छी बाल-केंद्रित फिल्में बनाई जाएं, तो दर्शक उन्हें देखने जरूर आएंगे.
- •भारतीय एनिमेशन तकनीकी रूप से कमजोर है और 'छोटा भीम' स्तर तक सीमित है, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा ने 'महा अवतार नरसिम्हा' जैसी सफल एनिमेटेड फिल्में बनाई हैं.
- •वितरकों का मानना है कि बच्चे खुद टिकट नहीं खरीदते, और माता-पिता को आकर्षित करने वाली फिल्में बनाना अधिक लाभदायक है, जिससे बच्चों की फिल्में उपेक्षित हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बॉलीवुड बच्चों की फिल्मों को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे भविष्य के दर्शक और सांस्कृतिक जुड़ाव खोने का खतरा है.
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