क्या आज वह जुनून खत्म हो गया है?
फिल्में
N
News1804-02-2026, 14:55

फिल्मों का बदलता चेहरा: क्या 'जुनून' की जगह 'प्रोजेक्ट' ने ले ली है?

  • आजकल फिल्में 'असेंबली लाइन' की तरह बन रही हैं, जहां गति और मात्रा को कलात्मक गहराई से ज़्यादा महत्व दिया जा रहा है, जिससे फिल्में जल्दी भुला दी जाती हैं.
  • ऐतिहासिक रूप से, 'मुगल-ए-आजम' जैसी प्रतिष्ठित फिल्मों को बनने में सालों, यहां तक कि दशकों लग गए, जो के. आसिफ जैसे फिल्म निर्माताओं के अपार जुनून और समर्पण का परिणाम था.
  • राज कपूर, गुरु दत्त और बिमल रॉय जैसे पुराने फिल्म निर्माता एक प्रोजेक्ट में पूरी तरह डूब जाते थे, जिससे वास्तविक चरित्र विकास और भावनात्मक जुड़ाव संभव हो पाता था.
  • तकनीक जहां सुविधाएं देती है, वहीं जुनून के बिना उस पर अत्यधिक निर्भरता भावनात्मक गहराई की कमी ला सकती है, जबकि 'बाहुबली' जैसी फिल्मों में तकनीक का इस्तेमाल समर्पण के साथ किया गया था.
  • 'जुबली' रन से 'ओपनिंग वीकेंड' बॉक्स ऑफिस सफलता की ओर बदलाव कलात्मक दीर्घायु से तत्काल व्यावसायिक लाभ पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है, जिससे धैर्य और शिल्प कौशल का महत्व कम हो गया है.

More like this

Loading more articles...