फाग की धुन से मॉडर्न बीट्स तक, होली के गानों का मिजाज बदला, जादू बरकरार.

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News18•04-03-2026, 07:01
फाग की धुन से मॉडर्न बीट्स तक, होली के गानों का मिजाज बदला, जादू बरकरार.
- •होली के गाने दशकों में पारंपरिक लोक संगीत से आधुनिक बेस और पार्टी बीट्स में बदल गए हैं.
- •संगीत शैलियों में बदलाव के बावजूद, रंगों के त्योहार का सार और जादू बरकरार है.
- •"रंग बरसे" (सिलसिला, 1981) और "होली के दिन दिल खिल जाते हैं" (शोले, 1975) जैसे क्लासिक गाने लोक जड़ों और फिल्मी धुनों के साथ मानक स्थापित करते हैं.
- •90 के दशक में नदीम-श्रवण के "सारे रंगों से है" (धरती पुत्र, 1993) ने परंपरा और आधुनिकता को जोड़ा, जबकि "होली खेले रघुवीरा" (बागबान, 2003) ने अवधी 'होरी' को पुनर्जीवित किया.
- •प्रीतम का "बलम पिचकारी" (ये जवानी है दीवानी, 2013) जैसे नए जमाने के हिट गाने इलेक्ट्रॉनिक बीट्स के साथ युवा-केंद्रित पार्टी एंथम में बदलाव का उदाहरण हैं.
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