माता बाला सुंदरी मंदिर: 61 किलो मक्खन की परंपरा, औषधीय चमत्कार और प्राचीन आस्था

अंबाला
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News18•26-01-2026, 18:22
माता बाला सुंदरी मंदिर: 61 किलो मक्खन की परंपरा, औषधीय चमत्कार और प्राचीन आस्था
- •अंबाला के मुलाना स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर में संक्रांति पर देवी की पिंडी पर 61 किलो मक्खन का लेप लगाने की 500 साल पुरानी अनूठी परंपरा है.
- •यह परंपरा, जो 20 वर्षों से चली आ रही है, एक किंवदंती से जुड़ी है जिसमें देवी ने राक्षसों से युद्ध के बाद अपने घावों पर मक्खन लगाया था.
- •भक्तों का मानना है कि प्रसाद के रूप में वितरित मक्खन में औषधीय गुण होते हैं, जो त्वचा संबंधी बीमारियों से राहत दिलाते हैं.
- •मंदिर की स्थापना लगभग 1426 में सोरज सिंह ने की थी, जब माता बाला सुंदरी ने उन्हें सपने में दर्शन देकर प्लेग महामारी के अंत का आशीर्वाद दिया था.
- •नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से, विभिन्न राज्यों से हजारों भक्त मेले में भाग लेने और पवित्र मक्खन प्रसाद प्राप्त करने के लिए सालाना आते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अंबाला में माता बाला सुंदरी मंदिर में 61 किलो मक्खन की अनूठी परंपरा है, जिसे औषधीय लाभ देने वाला माना जाता है.
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