In the years before the pandemic, India—now the world’s second-largest sugar producer—saw sugar demand expand at an annual pace of over 4%. That momentum has faded.
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Moneycontrol02-01-2026, 11:37

भारत में चीनी की मांग घटी: मधुमेह चिंता और बदलती आदतों का असर.

  • भारत में चीनी की मांग मधुमेह संबंधी चिंताओं और युवा उपभोक्ताओं के बीच बदलती खान-पान की आदतों के कारण स्थिर हो रही है.
  • उद्योग के अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष टेबल शुगर की खपत में मामूली वृद्धि होगी; ISMA ने 1.42% की वृद्धि का अनुमान लगाया है.
  • महामारी से पहले की 4% वार्षिक वृद्धि अब धीमी हो गई है, 2025-26 के लिए अनुमानित खपत 2024 के स्तर (29 मिलियन टन) से कम है.
  • ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, यह बदलाव स्वास्थ्य जागरूकता, आहार में परिवर्तन और वैकल्पिक मिठास व कम चीनी वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की ओर झुकाव को दर्शाता है.
  • भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मधुमेह आबादी (100 मिलियन मधुमेह रोगी, 136 मिलियन प्री-डायबिटिक) है, जिसके लिए यह प्रवृत्ति महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थ रखती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: स्वास्थ्य जागरूकता के कारण भारत में चीनी की खपत धीमी हो रही है, जो मधुमेह से जूझ रहे देश के लिए महत्वपूर्ण है.

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