अंबेडकर की 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट': भारत की जाति व्यवस्था पर एक मौलिक आलोचना

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News18•31-01-2026, 13:45
अंबेडकर की 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट': भारत की जाति व्यवस्था पर एक मौलिक आलोचना
- •डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' जाति व्यवस्था पर उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो मूल रूप से एक भाषण था जिसे वे नहीं दे पाए थे.
- •1936 में प्रकाशित यह पुस्तक जाति के उद्भव, मनोविज्ञान और सामाजिक प्रभाव का आलोचनात्मक विश्लेषण करती है, जिसमें इसके पदानुक्रमित विभाजनों पर प्रकाश डाला गया है.
- •लाहौर में जाट-पात तोड़क मंडल के लिए तैयार किया गया यह भाषण, हिंदू धर्मग्रंथों की उनकी तीखी आलोचनाओं को संपादित करने से इनकार करने के कारण रद्द कर दिया गया था.
- •इस पुस्तक ने एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी, जिसमें महात्मा गांधी ने अंबेडकर के गुस्से को स्वीकार किया लेकिन उनके 'विनाशकारी' तरीकों से असहमत थे.
- •अंबेडकर ने तर्क दिया कि भारत की जाति व्यवस्था अद्वितीय है, एक धार्मिक-नैतिक स्तरीकरण जो जन्म से शुद्धता निर्धारित करता है, जो अन्यत्र आर्थिक वर्ग प्रणालियों से भिन्न है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अंबेडकर की 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' दलित आंदोलन के लिए एक मूलभूत ग्रंथ बनी हुई है, जो जाति की एक अडिग आलोचना प्रस्तुत करती है.
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