बलूचिस्तान का भारत में विलय का छूटा मौका: नेहरू के 'ना' ने कैसे बदला इतिहास

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News18•02-02-2026, 17:47
बलूचिस्तान का भारत में विलय का छूटा मौका: नेहरू के 'ना' ने कैसे बदला इतिहास
- •पाकिस्तान में विलय से पहले, कलात रियासत (बलूचिस्तान) भारत की आजादी के बाद 227 दिनों तक एक स्वतंत्र राष्ट्र था.
- •शुरुआत में, मुहम्मद अली जिन्ना बलूचिस्तान के पाकिस्तान में विलय के पक्ष में नहीं थे, इसे एक बोझ मानते थे.
- •भारत की लोकतांत्रिक संरचना से आकर्षित बलूच नेताओं ने धर्म के आधार पर पाकिस्तान में शामिल न होने की इच्छा से जवाहरलाल नेहरू से भारत में विलय का अनुरोध किया था.
- •नेहरू ने बलूचिस्तान के भारत से सीधे भौगोलिक जुड़ाव की कमी और पाकिस्तान के साथ युद्ध के डर का हवाला देते हुए विलय प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
- •पाकिस्तान ने मार्च 1948 में बलूचिस्तान का जबरन विलय कर लिया, कलात के खान को बंदूक की नोक पर विलय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: नेहरू के बलूचिस्तान के विलय अनुरोध को अस्वीकार करने के फैसले ने उसके भाग्य को बदल दिया, जिससे पाकिस्तान द्वारा उसका जबरन विलय हुआ.
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