बांग्लादेश 1971 के जख्म भूला, चरमपंथ के नए संकट की ओर.

ज्ञान
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News18•19-12-2025, 18:50
बांग्लादेश 1971 के जख्म भूला, चरमपंथ के नए संकट की ओर.
- •बांग्लादेश गंभीर राजनीतिक संकट और बढ़ते चरमपंथ का सामना कर रहा है, जो 1971 की क्रूरता की याद दिलाता है.
- •पाकिस्तान समर्थित भारत-विरोधी चरमपंथी ताकतें हावी हो रही हैं, जिससे हिंसा बढ़ रही है और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है.
- •शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा, और मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर पाकिस्तान की ओर झुकाव का आरोप है, जो 1971 के संघर्ष की याद दिलाता है.
- •लेख में 1971 के 'ऑपरेशन सर्चलाइट' का विवरण है, जो पाकिस्तानी सेना का एक क्रूर अभियान था जिसमें नरसंहार, यौन हिंसा और बंगाली, हिंदू व बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया गया था.
- •1971 में भारत के हस्तक्षेप से बांग्लादेश को मुक्ति मिली, लेकिन अब देश चरमपंथ और भारत-विरोधी भावनाओं को अपनाकर पिछली गलतियों को दोहराने का जोखिम उठा रहा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बांग्लादेश 1971 के दुखद इतिहास को दोहराने का जोखिम उठा रहा है, अतीत की भयावहता को भूलकर चरमपंथ की ओर बढ़ रहा है.
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