विवेकानंद का भारत के लिए 'हिंदू दिमाग और इस्लामी शरीर' का दृष्टिकोण

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News18•12-01-2026, 12:15
विवेकानंद का भारत के लिए 'हिंदू दिमाग और इस्लामी शरीर' का दृष्टिकोण
- •स्वामी विवेकानंद ने मुगलों और अंग्रेजों सहित सभी मामलों को निष्पक्ष रूप से देखा, पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे.
- •उन्होंने सम्राट अकबर को 'व्यावहारिक रूप से एक हिंदू' और भारतीय संस्कृति को अपनाने वाले एक आदर्श शासक माना, उनकी सहिष्णुता और प्रशासनिक दृष्टिकोण की प्रशंसा की.
- •विवेकानंद मुगल वास्तुकला, विशेषकर ताजमहल से मंत्रमुग्ध थे, इसे शैलियों का संगम मानते थे.
- •उन्होंने इस्लाम की सामाजिक समानता और भाईचारे की प्रशंसा की, भारत के लिए 'इस्लामी शरीर' (मजबूत सामाजिक संरचना) को 'हिंदू दिमाग' (वेदांत दर्शन) के साथ जोड़ने की वकालत की.
- •उन्होंने औरंगजेब की हिंदू धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ के लिए आलोचना की, जिसे उन्होंने मुगल साम्राज्य के पतन का कारण माना.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: विवेकानंद ने एक मजबूत भारत के लिए वेदांत दर्शन और इस्लामी सामाजिक समानता के मिश्रण की वकालत की.
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