मुशिनी बीज: जहर से अमृत तक? आयुर्वेद घातक विष को दवा में बदलता है

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News18•01-02-2026, 06:11
मुशिनी बीज: जहर से अमृत तक? आयुर्वेद घातक विष को दवा में बदलता है
- •मुशिनी बीज (Nux Vomica), जिसे 'विषमुष्टि' भी कहते हैं, प्राकृतिक रूप से जहरीले होते हैं लेकिन शुद्धिकरण के बाद इनमें महत्वपूर्ण औषधीय गुण होते हैं.
- •आयुर्वेद इन बीजों को गाय के मूत्र या घी का उपयोग करके शुद्ध करता है, जिससे वे तंत्रिका तंत्र की समस्याओं, जोड़ों के दर्द और यौन शक्ति के लिए दवा बन जाते हैं.
- •इन बीजों में स्ट्राइकिनिन और ब्रुसिन नामक एल्कलॉइड होते हैं, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे इनका सीधा सेवन जानलेवा हो सकता है.
- •गिरिजन कोऑपरेटिव कॉर्पोरेशन (GCC) आदिवासियों से मुशिनी बीज 100 रुपये प्रति किलोग्राम पर खरीदता है, जिसका लक्ष्य इस साल रामपचोदावरम में 450 क्विंटल है.
- •आदिवासी, विशेष रूप से गुट्टिकोया समुदाय, संग्रह की कठिनाई के कारण खरीद मूल्य को 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मुशिनी बीज आयुर्वेद की जहर को शक्तिशाली दवा में बदलने की क्षमता का एक सशक्त उदाहरण है.
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