दुनिया का आखिरी गांव: स्वालबार्ड जहां मरना मना है और हमेशा रहती है रात
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News1821-01-2026, 16:47

दुनिया का आखिरी गांव: स्वालबार्ड जहां मरना मना है और हमेशा रहती है रात

  • नॉर्वे के पास स्थित स्वालबार्ड को 'दुनिया का आखिरी गांव' कहा जाता है, जहां मरने की अनुमति नहीं है क्योंकि पर्माफ्रॉस्ट के कारण शव सड़ते नहीं हैं.
  • गंभीर रूप से बीमार या बुजुर्ग निवासियों को अनिवार्य रूप से नॉर्वे भेज दिया जाता है, क्योंकि शवों के न सड़ने से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अंतिम संस्कार प्रतिबंधित हैं.
  • यह दुनिया का एकमात्र वीजा-मुक्त क्षेत्र है, जहां कोई भी आत्मनिर्भर होने पर रह और काम कर सकता है, यहां 2500-3000 लोग रहते हैं.
  • आर्कटिक पक्षियों की रक्षा के लिए बिल्लियां प्रतिबंधित हैं, जबकि ध्रुवीय भालुओं की बड़ी आबादी के कारण निवासियों को शहर के बाहर बंदूक ले जानी पड़ती है.
  • यह क्षेत्र महीनों तक ध्रुवीय रात और लगातार दिन के उजाले का अनुभव करता है, और वैश्विक बीज संरक्षण के लिए 'डूम्सडे वॉल्ट' का घर है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: स्वालबार्ड एक अनोखी आर्कटिक बस्ती है जहां मरने पर प्रतिबंध है, वीजा-मुक्त नीति है और चरम प्राकृतिक चक्र हैं.

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