मऊगंज के संतकुमार बने मिशाल.
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News1829-01-2026, 12:17

संतकुमार मिश्रा: बिना हाथ-पैर के 10 KM रोज, शिकायत नहीं! प्रेरणादायक कहानी

  • मऊगंज के संतकुमार मिश्रा, 36 वर्षीय, जन्म से बिना हाथ और एक पैर के बावजूद कृषि विभाग में क्लर्क के रूप में कार्यरत हैं.
  • वे प्रतिदिन 10 किलोमीटर बस और ऑटो से यात्रा कर कार्यालय पहुँचते हैं, जहाँ वे कंप्यूटर, फाइल और लेखन का काम कुशलता से करते हैं.
  • एम.ए. स्नातक संतकुमार 2016 से सरकारी सेवा में हैं और कर्मचारियों की कमी के कारण भारी कार्यभार संभालते हैं.
  • उनकी कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें कोई विशेष सुविधा नहीं मिलती, फिर भी वे कभी शिकायत नहीं करते, जो उनकी दृढ़ता को दर्शाता है.
  • वे आत्मनिर्भरता की वकालत करते हैं और मानते हैं कि विकलांगता एक मानसिकता है, युवाओं को नकारात्मकता से दूर रहने की सलाह देते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: संतकुमार मिश्रा की कहानी मानवीय लचीलेपन का एक शक्तिशाली प्रमाण है, जो दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प शारीरिक सीमाओं को पार करता है.

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