गांधी की अस्थि विसर्जन: संगम पर मंत्रों पर भारी पड़ा 'रघुपति राघव राजाराम'

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News18•30-01-2026, 15:02
गांधी की अस्थि विसर्जन: संगम पर मंत्रों पर भारी पड़ा 'रघुपति राघव राजाराम'
- •महात्मा गांधी की अंतिम अस्थियों का विसर्जन उनकी हत्या के 49 साल बाद 30 जनवरी 1997 को इलाहाबाद के संगम पर हुआ था.
- •कटक के एक बैंक लॉकर में 1950 के दशक से रखी अस्थियां, उनके परपोते तुषार गांधी के आवेदन के बाद अदालत के आदेश से निकाली गईं.
- •समारोह 1948 के विसर्जन जैसा ही था, जिसमें सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई और अस्थियों को एक विशेष सैन्य वाहन में ले जाया गया.
- •विसर्जन के दौरान, पारंपरिक मंत्रों के साथ बापू का पसंदीदा भजन, "रघुपति राघव राजाराम," गाया गया, जो उनकी सार्वभौमिक अपील को दर्शाता है.
- •इस आयोजन में भारी भीड़ उमड़ी, जो महात्मा गांधी के प्रति अटूट भक्ति और प्रेम को दर्शाता है, जिसमें "गांधी अमर हैं" की भावना गूंज रही थी.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: संगम पर महात्मा गांधी की अंतिम अस्थि विसर्जन ने उनकी स्थायी विरासत और एकता के सार्वभौमिक संदेश को प्रदर्शित किया.
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