जनवरी 2024 हिंसा के बाद संदेशखाली का माहौल बदल गया है.
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News1820-02-2026, 11:49

संदेशखाली: 2016 में तृणमूल ने ढहाया वाम किला, अब क्यों टिकी है पूरे बंगाल की नजर?

  • संदेशखाली, नॉर्थ 24 परगना की एक अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट, अपने राजनीतिक इतिहास, सामाजिक संरचना और हालिया घटनाओं के कारण सुर्खियों में है.
  • यह दशकों तक वामपंथी राजनीति का गढ़ रहा, माकपा ने 10 बार जीत दर्ज की और 1977 से 2011 तक लगातार आठ चुनाव जीते.
  • 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चे के लंबे वर्चस्व को तोड़ा, सुकुमार महाता ने जीत दर्ज की और 2021 में भी सीट बरकरार रखी.
  • भाजपा ने पिछले एक दशक में धीरे-धीरे पकड़ मजबूत की, 2021 में दूसरे नंबर पर पहुंची और हालिया लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई.
  • जनवरी 2024 की हिंसक घटनाओं और स्थानीय नेताओं पर लगे आरोपों ने सत्तारूढ़ पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया, जिससे भाजपा को फायदा मिल सकता है.

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