मरुधरा का इश्क: ढोला-मारू की वो दास्तां जिसके बिना राजस्थान का इतिहास अधूरा है.
बीकानेर
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News1806-02-2026, 09:49

ढोला-मारू: राजस्थान की अमर प्रेम कहानी, सदियों बाद भी जीवंत

  • ढोला-मारू की प्रेम कहानी, जो लगभग आठवीं शताब्दी की है, राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जैसे हीर-रांझा और सोहनी-महिवाल की कहानियां हैं.
  • नरवर के राजा नल के पुत्र शलवकुमार (ढोला) और पूंगल के राजा पिंगल की पुत्री मरुवाणी (मारू) का विवाह बचपन में ही अकाल के कारण एक राजनीतिक समझौते के तहत हुआ था, लेकिन ढोला बाद में अपनी पहली पत्नी को भूल गए.
  • मारू के पिता, राजा पिंगल ने नरवर में एक धूली (लोक गायक) को भेजा, जिसने मल्हार राग के गीतों के माध्यम से ढोला को उनकी भूली हुई शादी की याद दिलाई.
  • साजिशों और दुश्मनों का सामना करते हुए भी, ढोला अपनी काली ऊंटनी पर पूंगल गए और मारू को नरवर वापस लाए.
  • यह कहानी, जिसमें ढोला की दूसरी पत्नी मालवणी द्वारा मारू को स्वीकार करना भी शामिल है, राजस्थानी लोक जीवन, संगीत और अमर प्रेम का एक सजीव चित्रण है, जिसे आज भी लोकगीतों में गाया जाता है.

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