Central Jail Syalawas
दौसा
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News1821-12-2025, 21:42

श्यालावास जेल का कायापलट: 3 महीने में अपराध से उत्पादन की ओर, बना सुधार का मॉडल.

  • कभी अवैध गतिविधियों के लिए बदनाम सेंट्रल जेल श्यालावास ने 3 महीने में अपनी पहचान बदल दी है, अब यह रचनात्मकता और अनुशासन का केंद्र है.
  • जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ के प्रयासों से "नो योर प्रिजनर" कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें कैदियों को उनकी रुचि के अनुसार काम दिया गया, जिससे अवैध गतिविधियां रुकीं.
  • जेल अब एक औद्योगिक कार्यशाला बन गई है, जहां कंबल, लोहे के बक्से, कुर्सियां-टेबल और 'वोकल फॉर लोकल' के तहत कुल्हड़ जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं.
  • काम करने वाले कैदियों को प्रतिदिन 309 रुपये (कुशल) और 289 रुपये (अकुशल) का पारिश्रमिक मिलता है, साथ ही उनकी सजा में भी कमी की जाती है.
  • जेल का वार्षिक टर्नओवर 50 लाख रुपये से बढ़कर 3.25 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे यह राजस्थान की अन्य जेलों के लिए एक मिसाल बन गई है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सेंट्रल जेल श्यालावास 3 महीने में अपराध से सुधार और उत्पादन के मॉडल में बदल गई है.

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