जालोर शौर्य स्मारक:
जालोर
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News1826-01-2026, 07:56

जालोर का 'शौर्य स्मारक': 1971 की जीत का साक्षी, भारतीय सेना के पराक्रम का प्रतीक

  • जालोर के कोतवाली पुलिस थाना परिसर में स्थित शौर्य स्मारक में स्थापित T-55 टैंक 1971 के भारत-पाक युद्ध की जीत का गवाह है.
  • 1971 के युद्ध ने बांग्लादेश को जन्म दिया, जो पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान के नरसंहार और भारत के स्वतंत्रता समर्थन के बाद हुआ था.
  • 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने ढाका में भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने 93,000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण किया.
  • यह स्मारक इस ऐतिहासिक जीत का स्मरण कराता है, जिसने पाकिस्तान को दो भागों में बांटा और भारतीय सेना की रणनीतिक शक्ति को प्रदर्शित किया.
  • शौर्य स्मारक वीर चक्र और महावीर चक्र प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित कर प्रेरणा का स्रोत है, जो भावी पीढ़ियों को सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जालोर का शौर्य स्मारक 1971 के युद्ध में भारत की निर्णायक जीत और सैन्य पराक्रम का एक शक्तिशाली स्मरण कराता है.

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