बेटे को हॉस्टल में छोड़ा, ईंट-पत्थर से किया अभ्यास; ऐसे बनीं सुमन ढाका एक सफल पैरा एथलीट.
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बेटे को हॉस्टल में छोड़ा, ईंट-पत्थर से की प्रैक्टिस: सुमन ढाका की पैरा-एथलीट सफलता.
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News18•09-03-2026, 11:57
बेटे को हॉस्टल में छोड़ा, ईंट-पत्थर से की प्रैक्टिस: सुमन ढाका की पैरा-एथलीट सफलता.
•सीकर की सुमन ढाका ने लाखों मुश्किलों का सामना कर अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलीट बनकर सफलता हासिल की.
•2012 में शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और भाला फेंक से खेल करियर शुरू किया, संसाधनों के अभाव में ईंट-पत्थर से अभ्यास किया.
•अपने तीन साल के बेटे पार्थ को हॉस्टल में छोड़कर अभ्यास करने का कठिन निर्णय लिया, जो बाद में उनकी ताकत बना.
•2017 बीजिंग ओपन, 2018 फज्जा चैंपियनशिप, 2018 और 2023 एशियाई पैरा गेम्स, 2019 आईडब्ल्यूएएस वर्ल्ड गेम्स सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
•2018 में महाराणा प्रताप पुरस्कार, विशेष योग्यजन पुरस्कार (2018, 2025), ग्रामीण गौरव पुरस्कार (2019) और मत्स्य पुरस्कार (2024) से सम्मानित. वर्तमान में पीडब्ल्यूडी, सीकर में कार्यरत हैं.