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दक्षिण बंगाल
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News1822-01-2026, 18:50

अलीपुरद्वार का 'गरीब' गांव बना फूलों का विशाल बगीचा, ऋण से बदली किस्मत

  • अलीपुरद्वार के डांगापारा गांव ने फूलों की खेती से अपनी किस्मत बदली है, अब इसे 'नर्सरी पारा' के नाम से जाना जाता है.
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को राज्य सरकार से 3-10 लाख रुपये तक के ऋण मिले, जिससे गेंदा, गुड़हल और डहलिया जैसे विभिन्न फूलों की खेती की जा रही है.
  • यह गांव अब असम और बेंगलुरु सहित अन्य राज्यों में फूल भेजता है, और कूचबिहार तथा सिलीगुड़ी में भी इसकी अच्छी मांग है.
  • गांव का हर परिवार फूलों की खेती में शामिल है, जिससे आय में वृद्धि हुई है और आत्मनिर्भरता आई है.
  • इस परिवर्तन ने पर्यटकों को आकर्षित किया है, और बोक्सा टाइगर रिजर्व के पास स्थित इस गांव को अब 'फ्लावर विलेज' भी कहा जाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अलीपुरद्वार का एक गांव महिला स्वयं सहायता समूहों को सरकारी ऋण से फूलों की खेती कर गरीबी से बाहर निकला.

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