टू सू उत्सव: जंगलमहल का दिल, सिर्फ त्योहार नहीं! अनकही कहानियाँ उजागर करें.

दक्षिण बंगाल
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News18•13-01-2026, 13:17
टू सू उत्सव: जंगलमहल का दिल, सिर्फ त्योहार नहीं! अनकही कहानियाँ उजागर करें.
- •टू सू उत्सव, जिसे कई क्षेत्रों में भादू उत्सव भी कहा जाता है, जंगलमहल का मुख्य लोक उत्सव है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है.
- •टू सू एक कुंवारी युवती का प्रतीक है, जिसे सजाया जाता है और धूप में सुखाए गए चावल, फल, फूल, पीठे-पुली, दूध और मिठाइयाँ चढ़ाई जाती हैं.
- •लड़कियाँ पारंपरिक टू सू गीत गाती हैं, जो दैनिक जीवन, सुख-दुख और सामाजिक विचारों को दर्शाते हैं, ग्रामीण बंगाल की लोक संस्कृति को संरक्षित करते हैं.
- •यह उत्सव अग्रहायण महीने में शुरू होता है और पौष संक्रांति पर समाप्त होता है, जिसमें लोक देवी टू सू को नदी के पानी में विसर्जित किया जाता है.
- •ग्रामीण कारीगरों द्वारा बनाई गई टू सू मूर्तियों की बाजारों में भारी मांग है, जिनकी कीमत 20 रुपये से लेकर हजारों तक होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: टू सू उत्सव जंगलमहल का एक जीवंत लोक उत्सव है, जो परंपरा, समुदाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का जश्न मनाता है.
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