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गोरखपुर का ऐतिहासिक महत्व: पाल कालीन मूर्तियों और बौद्ध प्रभाव की विशेष गाथा.
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गोरखपुर में पाल काल की विरासत उजागर: बौद्ध संस्कृति से गहरा जुड़ाव.
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News18
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05-03-2026, 22:08
गोरखपुर में पाल काल की विरासत उजागर: बौद्ध संस्कृति से गहरा जुड़ाव.
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गोरखपुर की धरती में पाल काल (8वीं से 12वीं शताब्दी) की समृद्ध विरासत और बौद्ध संस्कृति से गहरा जुड़ाव मिला है.
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विष्णु मंदिर और एक प्रमुख पार्क में मिली काले पत्थर की मूर्तियाँ पाल कला शैली से मेल खाती हैं.
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दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर प्रज्ञा चतुर्वेदी ने इस ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि की है.
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गोरखपुर का इतिहास कुशीनगर से जुड़ा है, जहाँ भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था.
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पाल काल में गोरखपुर बौद्ध शिक्षाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा होगा.
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