तीन साल बाद अब तक "सौ दिन चले अढाई कोस" सी स्थिति है. 
मथुरा
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News1820-01-2026, 17:04

मथुरा शुगर मिल: तीन साल बाद भी डीपीआर अधूरा, किसान निराश

  • मथुरा के छाता विधानसभा क्षेत्र की शुगर मिल हर चुनाव में एक चुनावी मुद्दा बनी रहती है, जिसका उपयोग नेता वोट बटोरने के लिए करते हैं.
  • कभी गन्ने की खेती का एक संपन्न केंद्र रही इस मिल के बंद होने से मथुरा में गन्ने की खेती बंद हो गई है.
  • किसानों को योगी सरकार के तहत मिल के फिर से शुरू होने की उम्मीद थी, खासकर छाता विधायक चौधरी लक्ष्मी नारायण के गन्ना विकास मंत्री बनने के बाद.
  • 2022 में डीपीआर प्रस्ताव और बजट आवंटन के बावजूद, तीन साल बाद भी डीपीआर के लिए निविदा प्रक्रिया अधूरी है.
  • 1975 में स्थापित और 1978 में चालू हुई यह मिल कभी 46,000 किसानों को सेवा देती थी, लेकिन अब राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: वादे और डीपीआर के बावजूद, मथुरा शुगर मिल बंद है, जिससे किसान राजनीतिक निष्क्रियता से निराश हैं.

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