निकाह अधूरा इन शर्तों के बिना: जानिए शरीयत के आवश्यक सिद्धांत

अलीगढ़
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News18•20-01-2026, 11:26
निकाह अधूरा इन शर्तों के बिना: जानिए शरीयत के आवश्यक सिद्धांत
- •निकाह (इस्लामी विवाह) एक पवित्र सामाजिक अनुबंध है, जो शरीयत के सिद्धांतों और निर्धारित शर्तों के अनुसार ही वैध और पूर्ण माना जाता है.
- •मौलाना इफ्राहीम हुसैन के अनुसार, निकाह के लिए इजब और कुबूल (प्रस्ताव और स्वीकृति) तथा लड़की की स्पष्ट सहमति अत्यंत महत्वपूर्ण है.
- •निकाह को सार्वजनिक और प्रमाणित करने के लिए दो गवाहों की उपस्थिति आवश्यक है; लड़की के लिए वली (अभिभावक) की उपस्थिति भी शरीयत की आवश्यकता है.
- •महर (दहेज) का निर्धारण भी निकाह में एक आवश्यक शर्त है, क्योंकि यह महिला का अधिकार है और इसके बिना निकाह अधूरा है.
- •निकाह हलाल रिश्तों में होना चाहिए और इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) के दौरान निकाह वैध नहीं माना जाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: इस्लामी निकाह की वैधता के लिए सहमति, गवाह, महर और हलाल रिश्तों जैसी शरीयत की शर्तें अनिवार्य हैं.
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