2.5 लाख की नौकरी छोड़ बनीं 'गरीबों की मसीहा': गाजियाबाद की प्रियंका राणा की कहानी

गाजियाबाद
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News18•24-01-2026, 11:55
2.5 लाख की नौकरी छोड़ बनीं 'गरीबों की मसीहा': गाजियाबाद की प्रियंका राणा की कहानी
- •शामली की मूल निवासी और देवबंद में जन्मी प्रियंका राणा ने फैशन डिजाइनिंग में 2.5 लाख रुपये प्रति माह की नौकरी छोड़कर समाज सेवा का मार्ग चुना.
- •उन्होंने 'खुशी फाउंडेशन' की स्थापना की और घरेलू हिंसा व उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को मुफ्त कानूनी सलाह प्रदान करती हैं, उनके न्याय के लिए लड़ती हैं.
- •प्रियंका गाजियाबाद और एनसीआर में पशु अधिकारों की प्रबल समर्थक हैं, आवारा पशुओं के लिए नसबंदी और जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल हैं.
- •कोविड-19 महामारी के दौरान, उन्होंने लगभग 1.5 लाख जरूरतमंद लोगों को राशन वितरित किया, जिससे उन्हें 'अन्नपूर्णा' का नाम मिला.
- •वह राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर महिला अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं, यह मानती हैं कि महिलाएं समाज को बदल सकती हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: प्रियंका राणा ने एक सफल फैशन डिजाइनर से एक समर्पित समाज सेविका के रूप में खुद को बदला, महिलाओं, जानवरों और जरूरतमंदों की मदद की.
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