क्रांतिकारी रोशन सिंह को काकोरी नहीं, बमरौली कांड में दी गई फांसी: ब्रिटिश न्याय का काला सच

शाहजहाँपुर
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News18•21-12-2025, 14:15
क्रांतिकारी रोशन सिंह को काकोरी नहीं, बमरौली कांड में दी गई फांसी: ब्रिटिश न्याय का काला सच
- •25 दिसंबर, 1924 को बमरौली घटना हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) द्वारा हथियारों के लिए 'मनी एक्शन' थी, डकैती नहीं.
- •बमरौली ऑपरेशन के दौरान मोहनलाल नामक व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु हुई, जो बाद में क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह की फांसी का आधार बनी.
- •काकोरी रेल एक्शन में शामिल न होने के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने रोशन सिंह को फंसाने के लिए जानबूझकर बमरौली मामले को फिर से खोला.
- •इतिहासकार डॉ. विकास खुराना के अनुसार, ब्रिटिश रोशन सिंह से डरते थे और बमरौली की आकस्मिक गोलीबारी को 'न्यायिक हत्या' का बहाना बनाया.
- •रोशन सिंह को बमरौली घटना के लिए हत्या का दोषी ठहराया गया और 19 दिसंबर, 1927 को इलाहाबाद की मलाका जेल में फांसी दी गई.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: क्रांतिकारी रोशन सिंह को बमरौली कांड के बहाने ब्रिटिश सरकार ने 'न्यायिक हत्या' कर फांसी दी.
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