लिपुलेख बार्डर क्यों जरूरी है
बागेश्वर
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News1801-02-2026, 12:20

भोटिया समुदाय का पारंपरिक व्यापार संकट में, 6 साल से ठप कारोबार, सरकार से की यह मांग

  • उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले भोटिया समुदाय का पारंपरिक गर्म कपड़ों का व्यापार गंभीर संकट का सामना कर रहा है.
  • भारत, तिब्बत और चीन के बीच सदियों से चला आ रहा यह व्यापार आर्थिक गतिविधि के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम था.
  • व्यापारी लिपुलेख, नीति और तुन्नी दर्रों के माध्यम से तिब्बत और चीन से गर्म कपड़े लाते थे और भारत से अनाज, गुड़ आदि भेजते थे.
  • 2020 में कोरोना महामारी और भारत-चीन के बीच बढ़े राजनीतिक तनाव के कारण लिपुलेख दर्रा बंद होने से व्यापार 6 साल से ठप है.
  • भोटिया व्यापारी अब कोलकाता, दिल्ली से सामान आयात कर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है; वे सरकार से सीमित व्यापार के लिए सीमा खोलने की मांग कर रहे हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भोटिया समुदाय का सीमा पार व्यापार 6 साल से रुका हुआ है, जिससे आजीविका प्रभावित हुई है; वे सरकार से हस्तक्षेप चाहते हैं.

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