भेड़पालकों की दुनिया
पिथौरागढ़
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News1828-01-2026, 18:28

उत्तराखंड के पहाड़ों में भेड़पालकों का जीवन: सादगी, मेहनत और प्रकृति से जुड़ाव

  • उत्तराखंड के 70 वर्षीय भेड़पालक कुशल नागन्याल का जीवन पहाड़ों की चुनौतियों के बीच पशुपालन को समर्पित है.
  • वह 6 साल की उम्र से भेड़-बकरियां पाल रहे हैं और अपना पूरा जीवन अपनी पत्नी काली देवी और अपने झुंड के साथ जंगलों में बिताया है.
  • उनकी दिनचर्या सुबह 6 बजे शुरू होती है, जिसमें जानवरों की देखभाल, खाना बनाना और सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक जंगल में अपने झुंड को चराना शामिल है, वे लगातार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.
  • दो कुत्ते झुंड की रखवाली में मदद करते हैं, एक जंगल में और दूसरा घर पर, छोटे मेमनों को बाघों और भालुओं जैसे खतरों से बचाते हैं.
  • जंगली जानवरों और कठोर मौसम से लगातार खतरों के बावजूद, नागन्याल अपने जीवन को अपनाते हैं, इसे प्रकृति और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ जीवन का एक तरीका मानते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यह लेख उत्तराखंड में कुशल नागन्याल जैसे पहाड़ी भेड़पालकों के कठिन लेकिन संतोषजनक जीवन को दर्शाता है.

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