মা কালী
पश्चिम बंगाल
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News1828-01-2026, 19:35

बीरभूम का छिपा हुआ रत्न: महाराजा नंदकुमार का 1775 का काली मंदिर हुआ उजागर!

  • बीरभूम जिला ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से समृद्ध है, जिसमें कई सती पीठ, सिद्ध पीठ, शाही महल, जमींदार घर और अनगिनत काली मंदिर शामिल हैं.
  • नलहाटी, बीरभूम में नलाटेश्वरी सती पीठ के पास अकालपुर में गुह्यकाली मंदिर का एक अनूठा इतिहास और एक विशिष्ट काली प्रतिमा है.
  • महाराजा नंदकुमार द्वारा स्थापित, मंदिर में एक सर्प सिंहासन पर पंचमुंडी आसन पर विराजमान गुह्यकाली की प्रतिमा है, जो पारंपरिक काली प्रतिमाओं से भिन्न है.
  • प्रतिमा का इतिहास मगध राजा जरासंध से जुड़ा है, जिसे बाद में काशी राजा चैत सिंह के शासनकाल के दौरान एक किसान ने पाया था, और इसने वॉरेन हेस्टिंग्स का भी ध्यान आकर्षित किया था.
  • मूल रूप से ब्राह्मणी नदी के किनारे एक अष्टकोणीय ईंट के मंदिर में स्थापित, गुह्यकाली मंदिर तांत्रिक प्रथाओं के लिए जाना जाता है और एक सुंदर प्राकृतिक वातावरण में स्थित है, जो बीरभूम आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बीरभूम में महाराजा नंदकुमार द्वारा स्थापित प्राचीन गुह्यकाली मंदिर, उसकी अनूठी प्रतिमा और समृद्ध इतिहास को जानें.

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