मालदा का हथकरघा उद्योग: आधुनिक मशीनों के सामने परंपरा का संघर्ष | बुनकरों के जीवन की कहानी
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मालदा के बुनकर: आधुनिक मशीनों के बीच परंपरा की 'खटखट' और जीवन का संघर्ष.
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News18•02-03-2026, 15:41
मालदा के बुनकर: आधुनिक मशीनों के बीच परंपरा की 'खटखट' और जीवन का संघर्ष.
•मालदा के शाहपुर क्षेत्र में 'तांती पाड़ा' कभी हथकरघा की खटखट से गूंजता था, अब वहां सन्नाटा पसरा है.
•कम आय और अधिक श्रम के कारण कई बुनकर पलायन कर गए या पेशे बदल लिए; अब केवल लगभग 16 घरों में करघे हैं.
•वरिष्ठ बुनकर हरधन दास बताते हैं कि 15 साल पहले की तुलना में करघों की संख्या में भारी गिरावट आई है.
•तरुण दास जैसे बुनकर प्रतिदिन 300-400 रुपये कमाते हैं, लेकिन मौजूदा बाजार कीमतों के साथ परिवार चलाना मुश्किल है.
•समुदाय अब मुख्य रूप से खादी कपड़े का उत्पादन करता है, मालिकों के अधीन काम करता है और केवल श्रम प्रदान करता है, परंपरा को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहा है.