पश्चिम मेदिनीपुर की प्रभाती देवी: गरीबी से लड़ती, घर संभालती 'रक्तमांस की दुर्गा' की प्रेरक कहानी.
Loading more articles...
मेदिनीपुर की प्रभाती देवी: 'रक्तमांस की दुर्गा' अपनी दृढ़ता से कर रही हैं प्रेरित.
N
News18•24-02-2026, 14:29
मेदिनीपुर की प्रभाती देवी: 'रक्तमांस की दुर्गा' अपनी दृढ़ता से कर रही हैं प्रेरित.
•पश्चिम मेदिनीपुर के नारमा गांव की गृहिणी प्रभाती माइती गरीबी के बावजूद दृढ़ता का उदाहरण पेश करती हैं.
•वह साल के पत्तों की प्लेटें सिलकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं, जिससे उन्हें मासिक 6-7 हजार रुपये मिलते हैं, जो उनके बच्चों की जरूरतों और बचत के लिए महत्वपूर्ण है.
•पूजा के मौसम में, प्रभाती अपने मूर्ति बनाने वाले पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं, फ्रेमवर्क से लेकर पेंटिंग तक हर कदम में सहायता करती हैं.
•एक दूरदराज के गांव में सीमित अवसरों के बावजूद, उनकी इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी की भावना उन्हें आगे बढ़ाती है.
•प्रभाती की कहानी बताती है कि देवत्व केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि आम लोगों के दैनिक संघर्षों में पाया जाता है, जो साहस और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.