
हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी के बीच गठबंधन से पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों पर असर पड़ने की उम्मीद है। उनकी पार्टियां क्रमशः 182 और 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं।
ममता बनर्जी "खाद्य राजनीति" और "पहचान की राजनीति" पर ध्यान केंद्रित करके राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भाजपा पर बंगाली संस्कृति और भाषा पर हमला करने का आरोप लगा रही हैं।
हाँ, नीतीश कुमार का बिहार की राजनीति से बाहर निकलना भाजपा को फायदा पहुँचा सकता है। यह बदलाव राज्य में भाजपा के सीधे प्रभुत्व का कारण बन सकता है, जिससे कुमार के इर्द-गिर्द केंद्रित गठबंधन की राजनीति से दूरी बनेगी।