बांग्लादेश का बंगाली अस्तित्व खतरे में: इस्लामी चरमपंथ राष्ट्र के सिद्धांतों को चुनौती दे रहा है.

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Firstpost•24-12-2025, 18:49
बांग्लादेश का बंगाली अस्तित्व खतरे में: इस्लामी चरमपंथ राष्ट्र के सिद्धांतों को चुनौती दे रहा है.
- •हिज्ब-उत-तहरीर और अंसार अल-इस्लाम जैसे कट्टरपंथी इस्लामी समूह बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष, बहुलवादी बंगाली पहचान को चुनौती देते हुए सांस्कृतिक संस्थानों और समाचार पत्रों के कार्यालयों पर हमला कर रहे हैं.
- •दीपु चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के झूठे आरोप में सार्वजनिक रूप से पीट-पीटकर जला दिया गया, पुलिस ने कथित तौर पर उसे भीड़ को सौंप दिया था. एक अन्य हिंदू, गोपाल बिस्वास को भी उनकी पहचान के लिए निशाना बनाया गया.
- •इस्लामी खुले तौर पर ISIS के झंडे लहरा रहे हैं, जिहादी नारे लगा रहे हैं, और खिलाफत स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, यहां तक कि राष्ट्रीय संसद परिसर पर भी हमला किया और भारतीय राजनयिक मिशनों पर भी हमला किया.
- •मुहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन की बढ़ती चरमपंथ को रोकने में विफलता के लिए आलोचना की गई है, जिसे लेखक पाकिस्तान की अस्थिरता फैलाने वाली रणनीति के समान बताता है.
- •लेख चेतावनी देता है कि बांग्लादेश "वापसी के बिंदु" के करीब है, यदि उसकी बंगाली पहचान ध्वस्त हो जाती है तो उसके सभ्यतागत अस्तित्व और एक चरमपंथी युद्धक्षेत्र बनने का जोखिम है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: इस्लामी चरमपंथ बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष बंगाली पहचान को खतरे में डाल रहा है, जिससे राष्ट्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है.
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