भारत का राफेल सौदा: मिथकों को तोड़ना, आसमान सुरक्षित करना और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देना.

ओपिनियन
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News18•19-01-2026, 15:40
भारत का राफेल सौदा: मिथकों को तोड़ना, आसमान सुरक्षित करना और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देना.
- •भारत ने डसॉल्ट एविएशन से 3.25 लाख करोड़ रुपये में 114 अतिरिक्त राफेल जेट खरीदने की योजना बनाई है, जिससे कुल बेड़ा 176 विमानों का हो जाएगा.
- •यह सौदा भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन घाटे को पूरा करने, पुराने विमानों को बदलने और चीन के J-20 और पाकिस्तान के J-35 से खतरों का मुकाबला करने के लिए है, जिसमें राफेल की उन्नत क्षमताएं परीक्षणों में बेहतर साबित हुई हैं.
- •3.25 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में विमान, हथियार, प्रशिक्षण, पुर्जे और F4 मानक तक के अपग्रेड शामिल हैं, जिसमें 50% ऑफसेट (1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) भारतीय उद्योग में वापस निवेश किए जाएंगे.
- •यह समझौता भारत के लिए परिचालन स्वायत्तता सुनिश्चित करता है, जिससे स्वदेशी हथियारों का एकीकरण और स्वतंत्र खतरे वाली लाइब्रेरी अपडेट की जा सकेगी, बिना मालिकाना स्रोत कोड तक पहुंच के.
- •114 जेट में से 96-102 भारत में निर्मित होंगे, जिसकी शुरुआत 30% स्वदेशी सामग्री से होगी और लक्ष्य 60-80% तक पहुंचने का है, जिससे एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा और हजारों नौकरियां पैदा होंगी.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत का राफेल सौदा हवाई श्रेष्ठता को मजबूत करने, स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए एक रणनीतिक कदम है.
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