ईरान युद्ध: पाकिस्तान का सबसे बड़ा रणनीतिक दुःस्वप्न
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ईरान युद्ध: पाकिस्तान के लिए आर्थिक, सुरक्षा और कूटनीतिक संकट का तूफान.
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Firstpost•11-03-2026, 12:22
ईरान युद्ध: पाकिस्तान के लिए आर्थिक, सुरक्षा और कूटनीतिक संकट का तूफान.
•28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के ईरान पर युद्ध ने अयातुल्ला अली खामेनेई को मार गिराया और प्रमुख बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जिससे ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी.
•पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक झटके का सामना करना पड़ रहा है: तेल की कीमतों में वृद्धि, मुद्रास्फीति, रुपये का अवमूल्यन और संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से प्रेषण (remittances) खतरे में हैं.
•ईरान के साथ पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं, जिससे बलूच अलगाववादियों और टीटीपी को बढ़ावा मिल सकता है और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण गहरा सकता है.
•इस्लामाबाद अमेरिका-इजरायल के हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई दोनों की निंदा करते हुए अमेरिका, आईएमएफ, खाड़ी देशों और ईरान के साथ संबंधों को संतुलित करते हुए एक जटिल कूटनीतिक संतुलन बना रहा है.
•यह संघर्ष पाकिस्तान के लिए "रणनीतिक दबाव" पैदा करता है, जो एक बहुआयामी तनाव परीक्षण है जिसके उसकी स्थिरता और क्षेत्रीय गतिशीलता के लिए गहरे निहितार्थ हैं.