मोदी सरकार ने गिग वर्कर्स के अधिकार बदले; चड्ढा की 'नकली सहानुभूति' उजागर.

ओपिनियन
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News18•05-01-2026, 14:27
मोदी सरकार ने गिग वर्कर्स के अधिकार बदले; चड्ढा की 'नकली सहानुभूति' उजागर.
- •भारत की गिग अर्थव्यवस्था में 8 मिलियन से अधिक श्रमिक हैं, जो 2030 तक 23.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
- •मोदी सरकार ने ऐतिहासिक श्रम संहिताएं (2020, 2025 में अधिसूचित) पेश कीं, जो गिग वर्कर्स को परिभाषित करती हैं और PF, पेंशन, ESI, मातृत्व जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ अनिवार्य करती हैं.
- •प्लेटफॉर्म को वार्षिक टर्नओवर का 1-2% एक समर्पित फंड में योगदान करना होगा; 90+ दिनों तक काम करने वाले गिग वर्कर्स केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकरण के साथ लाभ के पात्र होंगे.
- •PM-JAY (आयुष्मान भारत), PMMY, ई-श्रम पोर्टल, स्टैंड-अप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी मौजूदा योजनाएं गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य, ऋण और कौशल विकास हेतु विस्तारित की गई हैं.
- •लेख AAP के राघव चड्ढा की "पक्षपातपूर्ण बयानबाजी" और "नकली सहानुभूति" के लिए आलोचना करता है, उनके सोशल मीडिया पोस्ट की तुलना मोदी सरकार के ठोस कार्यों और भाजपा-शासित दिल्ली में उच्च न्यूनतम मजदूरी से करता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मोदी सरकार गिग वर्कर्स के अधिकारों और कल्याण के लिए ऐतिहासिक सुधारों का नेतृत्व कर रही है, राजनीतिक बयानबाजी का मुकाबला कर रही है.
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