राय: ईरान युद्ध से उत्पन्न तेल और एलपीजी संकट से भारत कैसे निपट रहा है 'मोदीडिप्लोमेसी' के माध्यम से
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ईरान युद्ध से उपजे तेल-एलपीजी संकट में 'मोदीडिप्लोमेसी' ने भारत को बचाया
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News18•21-03-2026, 10:52
ईरान युद्ध से उपजे तेल-एलपीजी संकट में 'मोदीडिप्लोमेसी' ने भारत को बचाया
•भारत ने 'मोदीडिप्लोमेसी' के माध्यम से पश्चिम एशिया ऊर्जा संकट (2026) को सफलतापूर्वक संभाला, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद तेल और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर रखी.
•पीएम मोदी के नेतृत्व में रणनीतिक दूरदर्शिता से महत्वपूर्ण कच्चे तेल भंडार (250 मीट्रिक टन), शोधन क्षमता (258 एमएमटीपीए) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (53 एलएमटी) बने, जिससे कमी नहीं हुई.
•भारत ने तेल आयात में विविधता लाई, किसी एक देश पर निर्भरता 25% तक सीमित की और 40 से अधिक देशों से खरीद की, जिसमें रियायती रूसी कच्चा तेल भी शामिल है.
•पीएम मोदी की खाड़ी देशों के नेताओं के साथ सक्रिय कूटनीति ने वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की और तनाव कम किया, जिससे भारत का बढ़ता कूटनीतिक प्रभाव प्रदर्शित हुआ.
•एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने, प्राथमिकता आवंटन और पीएमयूवाई जैसी योजनाओं के तहत निरंतर सब्सिडी जैसे घरेलू उपायों ने सामर्थ्य सुनिश्चित किया और मुद्रास्फीति को रोका.