गणतंत्र दिवस: क्या संविधान से 'धर्मनिरपेक्ष', 'समाजवादी' शब्द हटाने का समय आ गया है?

ओपिनियन
N
News18•26-01-2026, 08:46
गणतंत्र दिवस: क्या संविधान से 'धर्मनिरपेक्ष', 'समाजवादी' शब्द हटाने का समय आ गया है?
- •लेख में तर्क दिया गया है कि भारत को अपने 77वें गणतंत्र दिवस पर संविधान से 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्दों को हटा देना चाहिए, इन्हें गलती से शामिल किया गया बताया गया है.
- •ये शब्द आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा संसद को दरकिनार कर जोड़े गए थे, जिसकी आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले और तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने आलोचना की थी.
- •मसौदा समिति के अध्यक्ष बीआर अंबेडकर ने पहले प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष, संघीय, समाजवादी राज्यों का संघ' को शामिल करने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि राज्य की नीति समय के साथ लोगों द्वारा तय की जानी चाहिए.
- •जवाहरलाल नेहरू ने भी 'धर्मनिरपेक्षता' को पश्चिमी अवधारणा के रूप में विरोध किया था, उनका मानना था कि यह भारत के धार्मिक सहिष्णुता के विचारों के अनुरूप नहीं है, जबकि अंबेडकर ने कहा था कि संविधान पहले ही अनुच्छेद 16 और 19 के माध्यम से गैर-भेदभाव सुनिश्चित करता है.
- •सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन शर्तों को हटाने की याचिकाओं को खारिज करने और जुलाई 2025 में केंद्रीय कानून मंत्री द्वारा ऐसी कोई योजना न होने के बावजूद, लेखक का सुझाव है कि वर्तमान सरकार के पास कार्रवाई करने का जनादेश है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत को अपने संविधान से 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्दों को हटाने पर विचार करना चाहिए, जो इसके मूल इरादे के अनुरूप होगा.
✦
More like this
Loading more articles...





