ऐसा करने से लागत भी अधिक आएगी. किसान का मानना है कि एक कट्ठा में गेहूं की उपज 2 मन, डेढ़ मन से लेकर 1 मन तक होती है. अलग-अलग प्रकार के वैरायटी के बीज की उपज भी अलग-अलग होती है. किसानों को समय के साथ सिंचाई करनी होगी, ताकि उनकी फसल सुरक्षित रहे और अच्छी उपज प्राप्त हो.
कृषि
N
News1803-02-2026, 15:08

बिहार में किसानों पर मौसम की मार: गेहूं और आलू की फसल संकट में, सिंचाई खर्च बढ़ा

  • बिहार में 5-6 दिनों से लगातार धूप और बढ़ते तापमान से गेहूं और आलू की खेती प्रभावित हो रही है.
  • असामान्य मौसम के कारण किसानों को अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत बढ़ रही है और सिंचाई सुविधा रहित क्षेत्रों में फसल सूखने का खतरा है.
  • जहानाबाद के घोसी ब्लॉक के किसान सिद्धनाथ कुमार ने बढ़ते तापमान से फसल उत्पादन और आर्थिक बोझ पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर प्रकाश डाला.
  • आमतौर पर गेहूं के खेतों को 3 से 4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में बीज की किस्म के आधार पर 5 बार तक सिंचाई करनी पड़ सकती है.
  • बदलते मौसम के बीच किसानों को अपनी फसलों को बचाने और अच्छी उपज सुनिश्चित करने के लिए समय पर और पर्याप्त सिंचाई करना महत्वपूर्ण है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बिहार के किसान असामान्य गर्मी के कारण बढ़ती लागत और फसल जोखिम का सामना कर रहे हैं, गेहूं और आलू के लिए अधिक सिंचाई की मांग है.

More like this

Loading more articles...