शिव कुमार यादव ने बताया कि जब वे बाहर काम कर रहे थे, तो उन्हें महसूस हुआ कि बाहर मजदूरी करने से केवल दो वक्त की रोटी तो मिल रही है, लेकिन न सम्मान है और न ही भविष्य की कोई ठोस दिशा. तब उन्होंने अपने गांव लौटकर कुछ नया करने का संकल्प लिया. गांव पहुंचने के बाद उन्होंने अपने घर के पास बंजर पड़ी जमीन को लीज पर लिया और सब्जी की खेती शुरू की.
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News1828-12-2025, 21:14

शहर की मजदूरी छोड़ गांव में खेती, सरकारी योजनाओं से शिव कुमार बने सफल उद्यमी.

  • शिव कुमार ने सम्मान और भविष्य की तलाश में शहर की मजदूरी छोड़ गांव में खेती शुरू की.
  • शुरुआत में सिंचाई की कमी से ₹2 लाख का नुकसान हुआ, लेकिन हार नहीं मानी.
  • 2022 में भूमि संरक्षण विभाग की डीप बोरिंग योजना से लाभ मिला, जिससे किस्मत बदल गई.
  • तरबूज से ₹2.5 लाख और टमाटर से ₹3.5 लाख का मुनाफा कमाया, आधुनिक खेती अपनाई.
  • अब आत्मनिर्भर हैं, कई लोगों को रोजगार दे रहे हैं और पशुपालन से भी आय अर्जित कर रहे हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सरकारी योजनाओं और दृढ़ संकल्प से एक मजदूर कैसे सफल उद्यमी बन सकता है, शिव कुमार की कहानी इसका प्रमाण है.

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