पशुपालकों के लिए चेतावनी: किलनी, चीचड़ और जूं से पशुधन को खतरा, जानें प्रभावी बचाव के तरीके.
पशुधन पर मंडराया खतरा: किलनी, चीचड़ और जूं से बचाव के असरदार उपाय जानें.
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News18•06-04-2026, 12:57
पशुधन पर मंडराया खतरा: किलनी, चीचड़ और जूं से बचाव के असरदार उपाय जानें.
•किलनी, चीचड़ और जूं जैसे परजीवी पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं, जिससे खुजली, जलन और संभावित जीवाणु संक्रमण होता है.
•पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी के अनुसार, किलनी मवेशियों में, जबकि जूं भैंस, भेड़, बकरी, कुत्ते, बिल्ली और मुर्गियों में अधिक पाए जाते हैं; अनियंत्रित होने पर यह समस्या तेजी से बढ़ती है.
•ये बाहरी परजीवी जानवरों से चिपक कर खून चूसते हैं या त्वचा की कोशिकाओं को खाते हैं, जिससे दर्द, जलन और व्यवहार में बदलाव आता है.
•गर्मी और बरसात के मौसम में इनका प्रकोप अधिक होता है; ये परजीवी चरागाहों, बाहरी संपर्क या संक्रमित जानवरों के माध्यम से पशुशाला में प्रवेश करते हैं और दरारों में छिपते हैं.
•बचाव के लिए स्वच्छता और प्रबंधन महत्वपूर्ण है: नियमित रूप से पशुशाला की सफाई करें, गोबर का उचित निपटान करें, जलभराव रोकें, दरारें भरें और जानवरों की नियमित ग्रूमिंग करें. उपचार के लिए पशु चिकित्सक से सलाह लें.