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देसी गायें: किसानों के लिए कामधेनु, उच्च दूध उत्पादन और कम देखभाल
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देसी गायें किसानों की कामधेनु: अधिक दूध, कम देखभाल
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News18
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10-03-2026, 10:39
देसी गायें किसानों की कामधेनु: अधिक दूध, कम देखभाल
•
देसी नस्ल की गायें किसानों के लिए कामधेनु समान हैं, जो अधिक दूध देती हैं और कम देखभाल मांगती हैं.
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राजस्थान में साहीवाल, गिर, थारपारकर और राठी जैसी प्रमुख देसी नस्लें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं.
•
साहीवाल गायें (मूल मोंटगोमरी) प्रति वर्ष 2000-2500 लीटर दूध देती हैं, जिसमें 4.5% वसा होती है.
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गिर गायें (मूल काठियावाड़) 1500-1800 लीटर प्रति ब्यांत और थारपारकर गायें (मूल सिंध) 1600-2000 लीटर प्रति वर्ष दूध देती हैं.
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राठी गायें, 'राजस्थान की कामधेनु' कहलाती हैं, प्रति ब्यांत 1062-2810 लीटर दूध देती हैं और वसा अधिक होती है.
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