परमेंद्र कुमार को स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उद्यान विभाग से जुड़े विवेक कुमार ने प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया. साथ ही रंजन दुबे ने भी उन्हें इस नई पहल के लिए प्रोत्साहित किया. परमेंद्र कुमार बताते हैं कि यह उनके लिए पूरी तरह नया अनुभव था. शुरुआत में डर भी था, क्योंकि इससे पहले उन्होंने कभी इस तरह की आधुनिक फसल नहीं उगाई थी. लेकिन उद्यान विभाग के सहयोग और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और खेती शुरू की.
कृषि
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News1807-01-2026, 20:45

पांकी में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती, किसान ने बदली अपनी किस्मत.

  • परमेंद्र कुमार ने पांकी प्रखंड में 2.5 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की, जो इस क्षेत्र में पहली बार है.
  • बागवानी विभाग के विवेक कुमार और रंजन दुबे से प्रेरित होकर, उन्होंने सरकारी योजनाओं के समर्थन से शुरुआती डर पर काबू पाया.
  • लगभग 4 लाख रुपये का निवेश किया और नासिक, महाराष्ट्र से जैविक पौधे प्राप्त किए.
  • प्रतिदिन 30-35 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन करते हैं, जिसे झारखंड, बिहार और कोलकाता के बाजारों में ₹300 प्रति किलोग्राम पर बेचते हैं.
  • उनकी सफलता दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से किसान अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: परमेंद्र कुमार की पांकी में स्ट्रॉबेरी की खेती आधुनिक कृषि से किसानों की आय बढ़ाने का उदाहरण है.

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