वहीं, मटर की अच्छी उपज के लिए किसान सड़ी हुई गोबर की खाद  यूरिया, फास्फेट और पोटाश का संतुलित मात्रा अंतिम जुताई के समय मिला कर देनी चाहिए. इसके अलावा बुवाई के समय 15 से 60 दिन बाद खड़ी फसल में टॉप ड्रेसिंग प्रयोग करना चाहिए. शीतकालीन फसल होने के कारण मटर में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन 7 से 10 दिन में एक बार हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है.
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News1803-02-2026, 21:12

मटर की खेती: सही खाद से बढ़ाएं पैदावार, किसान कमाएंगे बंपर मुनाफा

  • किसान निर्मल महतो ने मटर की खेती के पारंपरिक तरीकों को साझा किया, बताया कि यह सर्दियों की फसल होने के बावजूद इसकी मांग साल भर रहती है.
  • मटर की उन्नत किस्में 40-50 दिनों में तैयार हो जाती हैं, पौधे 110 सेमी तक बढ़ते हैं और 3 महीने के चक्र में अधिक फली देते हैं.
  • 30 डिसमिल जमीन पर मटर की खेती में 8-10 हजार रुपये का खर्च आता है, जिससे 25-35 क्विंटल उपज और 50,000 रुपये तक की आय होती है.
  • अच्छी उपज के लिए, किसान अंतिम जुताई के दौरान अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद, यूरिया, फास्फेट और पोटाश का संतुलित मिश्रण उपयोग करें, साथ ही बुवाई के 15-60 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग करें.
  • फूल आने के दौरान खेत में नमी बनाए रखें, समय पर खरपतवार निकालें और कीटों को नियंत्रित करने के लिए जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें ताकि अच्छी फसल और बाजार मूल्य मिल सके.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मटर की खेती में सही खाद और कीट नियंत्रण से पैदावार और किसानों की आय में काफी वृद्धि हो सकती है.

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