थनैला मुख्य रूप से जीवाणु के अटैक से होता है. अगर पशुपालक साफ-सफाई का ध्यान रखें और दूध निकालने के बाद पशु को खड़ा रखने की आदत डालें, तो यह बीमारी होगी ही नहीं. विनोद का मानना है कि इन छोटे लेकिन असरदार नुस्खों को अपनाकर किसान बिना भारी-भरकम डॉक्टर खर्च के अपने मवेशियों को सुरक्षित रख सकते हैं.
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News1812-02-2026, 23:13

गाय-भैंस के थन में सूजन? तुरंत करें ये काम, वरना बढ़ेगा संक्रमण का खतरा.

  • मस्टाइटिस से दूध की गुणवत्ता और उत्पादन में भारी गिरावट आती है; शुरुआती लक्षणों की पहचान महत्वपूर्ण है.
  • थन में अचानक सूजन, कठोरता या लालिमा संक्रमण की शुरुआत का संकेत है, जिस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.
  • पारंपरिक उपाय: अजवाइन के उबले पानी की गर्म सिकाई दिन में 4-5 बार 2-3 दिनों तक करें.
  • दूध निकालने के बाद जानवरों को कम से कम 30 मिनट तक खड़ा रखें ताकि थन के छिद्र बंद हो सकें और संक्रमण रुके.
  • स्वच्छता बनाए रखें और जीवाणु संक्रमण से बचने के लिए थन को नियमित रूप से बीटाडीन या एंटीबायोटिक घोल से पोंछें.

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