পূর্ববঙ্গের অনেকবাড়িতে এদিন ইলিশ বরণ ও ইলিশের বিয়ে দেওয়ার চল আছে। দূর্বা, তেল ও সিঁদুর সহযোগে মাছটিকে উলু ও শঙ্খধ্বনি দিয়ে বরণ করা হয়।
ज्योतिष
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News1822-01-2026, 13:45

सरस्वती पूजा: कुछ घरों में मांसाहारी परंपरा, क्यों खाई जाती है 'जोड़ा इलिश' मछली?

  • सरस्वती पूजा, जिसे बसंत पंचमी भी कहते हैं, बंगाल में ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा का महत्वपूर्ण त्योहार है.
  • बिशुद्ध सिद्धांत पंजिका और गुप्तप्रेस पंजिका दोनों के अनुसार, सरस्वती पूजा के लिए पंचमी तिथि 22 जनवरी को शुरू होती है.
  • पारंपरिक चढ़ावे में आम के फूल, दवात और नरकट की कलम, पलाश के फूल, किताबें, वाद्य यंत्र, गेंदे के फूल, मीठी बूंदी और राजभोग शामिल हैं.
  • सरस्वती पूजा के बाद शीतल षष्ठी मनाई जाती है, जिसमें अगले दिन 'गोटा सेद्धो' (उबली हुई साबुत सब्जियां) ठंडी खाई जाती हैं, क्योंकि यह 'अरंधन' (खाना न पकाने) का दिन होता है.
  • सरस्वती पूजा मुख्य रूप से शाकाहारी होने के बावजूद, कुछ घरों में, खासकर पूर्वी बंगाल से, 'जोड़ा इलिश' (हिल्सा मछली का जोड़ा) खाने की परंपरा है, जो श्री पंचमी के रीति-रिवाजों से जुड़ी है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सरस्वती पूजा में पारंपरिक शाकाहारी पूजा के साथ कुछ बंगाली घरों में हिल्सा मछली की अनूठी परंपरा भी है.

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